उज्जैन संभाग

त्रिशूल शिव गण वाहिनी 2 नवंबर को शिप्रा प्रशिक्षणा निकालेगा


उज्जैन। त्रिशूल शिवगण वाहिनी शिप्रा प्रशिक्षणा यात्रा 2नवंबर को निकालेगा। इसका समापन 5 नवंबर को होगा। यह जानकारी महामंडलेश्वर शैलेश आनंद गिरि जी महाराज जूना अखाड़ा एवं महामंडलेश्वर ज्ञान दास जी निर्मोही अखाड़ा दादू दयाल आश्रम, त्रिशूल शिवगण वाहिनी के संस्थापकगण आदित्य नागर पूर्व अपर आयुक्त नगर निगम एवं सुरेन्द्र चतुर्वेदी राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय ब्राहम्मण समाज ने पत्रकारवार्ता के दौरान यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संतों के मार्गदर्शन में  त्रिशूल शिवगण वाहिनी द्वारा “उद्गम से संगम पर्यंत संपूर्ण शिप्रा प्रदक्षिणा” यात्रा का आयोजन किया जा रहा है।प्रदक्षिणा” यात्रा 2 नवम्बर को सुबह 8 बजे रामघाट मुख्य आरती द्वार उज्जैन से प्रारम्भ होकर 5 नवम्बर को शाम 5 बजे के उपरांत रामघाट पर ही “एक दिया शिप्रा के नाम” अभियान के साथ सम्पन्न होगी। प्रेस वार्ता में त्रिशूल शिवगण वाहिनी के पदाधिकारी पंडित शैलेंद्र द्विवेदी, रमाकांत शर्मा, दिनेश रावल, योगेश शर्मा, रामगोपाल शर्मा, शैलेश दुबे, विनय कुमार ओझा, यश जोशी, गौरव उपाध्याय, एसएन उपाध्याय, ऐश्वर्या नागर, किरणकांत मेहता, हेमंत व्यास प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। आपने बताया कि शिप्रा प्रदक्षिणा का उद्देश्य पवित्र पावनी शिप्रा नदी को उसके पौराणिक स्वरुप में लौटाने और उसे निर्मल करने के लिए जनजागरण करना और आम नागरिकों को जल संवर्धन के प्रेरित करना है। उन्होने बताया कि मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा शिप्रा के लिए किये गए कार्य को आगे बढाया जाकर शासन को जनता का सहयोग दिलाना भी संस्था का उद्देश्य है। यात्रा की जानकारी देते हुए संस्थापकगण ने बताया कि यात्रा दिनांक 2 नवम्बर को मुख्य आरती द्वार रामघाट से प्रातः 8 बजे प्रारम्भ होगी जिसमें आशीर्वाद दाता श्रीमहंत पीर सुन्दरपुरीजी महाराज, जूना अखाडा (दत्त अखाड़ा घाट), जगद्गुरु श्री श्रीकांताचार्यजी, तिरुपति धाम, श्री रंगनाथाचार्य जी अवंतिका पीठाधीश्वर रामानुज कोट, महंतश्री रामेश्वरदास जी महाराज अध्यक्ष स्थानीय अखाडा परिषद, महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद जी संस्थापक चार धाम आश्रम, महामंडलेश्वर श्री अतुलेषानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर भागवातानंद गिरी भगवान बापू, निरंजनीअखाड़ा, महामंडलेश्वर धर्मेन्द्र गिरीजी, जूनाअखाड़ा, केवड़ेश्वरमहाकाल आश्रम, शिप्रा उद्दूम, महामंडलेश्वर थी प्रेमानंद जी, महामंडलेश्वर श्री मनीष दास जी, ददुआ आश्रम, श्री वीतरागानंद जी सरस्वती दंडी स्वामी संस्थापक उपनिषद आश्रम, महामंडलेश्वर श्री नरसिंह दास जी, मांडव पीठ, सहित संत समाज के महामंडलेश्वर, पीठाधीश्वर, संत, महंत, धर्मगुरुओं का सानिध्य रहेगा, साथ ही समय-समय पर आमंत्रित विशिष्ट धर्मगुरुओं की भी उपस्थिति रहेगी। प्रदक्षिणा के दौरान विभिन्न पड़ाव स्थलों पर “सनातन पंचायत” के माध्यम से धर्म चेतना सभा आयोजित की जावेगी।

संस्थापक आदित्य नागर ने विस्तृत कार्यकम देते हुए बताया कि प्रदक्षिणा यात्रा में 100 से अधिक यात्री सम्मिलित होंगे। यात्रा 2 नवम्बर को ग्राम बोलासा, शिप्रा, दकनाखेडी होती हुई मुंडला दोसर शिप्रा उद्गम पर पहुंचेगी जहां रात्री विश्राम होगा। 3 नवम्बर को शिप्रा उद्गम से सिमरोड होते हुए दत्त अखाडे पर पहुंचेगी जहां शिप्रा आरती एवं पूजन होगा तथा उपनिषद आश्रम /दादूदयाल आश्रम पर सनातन पंचायत होगी तथा रात्री विश्राम होगा। 4 नवम्बर को उपनिषद आश्रम से यात्रा निकलकर मेलेश्वर महादेव उन्हेल, आलोट होते हुए ग्राम सिपावरा शिप्रा चम्बल संगम पर पहुंचेगी जहां सनातन पंचायत एवं रात्री विश्राम होगा। 5 नवम्बर को शिप्रा चम्बल संगम से महिदपुर, नारायणा धाम होते हुए सायं 5 बजे रामघाट आरती द्वार पर पहुंचेगे। रामघाट पर शिप्रा पूजन, शिप्रा आरती, चुनरी समर्पण के उपरांत “एक दिया शिप्रा के नाम” अभियान की शुरुआत की जावेगी जिसमें आम जनों से एक दिया शिप्रा को अर्पित करने की अपील की गई है। सभी पढाव स्थलों पर भी दीप दान किया जावेगा। इसके पूर्व 1 नवम्बर को यात्रा की पूर्व संध्या पर आरती द्वार रामघाट पर शिप्रा मैया की आरती की जाकर यात्रा की सफलता के लिए आशिर्वाद लिया जावेगा।

ध्यानश्री शैलेष आनंद गिरी महाराज महामण्डलेश्वर ने बताया कि सनातन पंचायत के माध्यम से नदी-नारी और न्याय पर चर्चा की जावेगी जिसमें आम जनता को इनकी रक्षा के लिए आगे आने का आव्हान किया जावेगा। शिप्रा नदी को उसके पौराणिक स्वरुप में लौटाने के लिए सभी को पूरी लगन के साथ आगे आना होगा। श्री ज्ञान दास जी महाराज ने कहा कि शिप्रा मैया को गंदगी से मुक्त करने और उसे प्रवाहमान बनाने के लिए बहुत आवश्यक है कि इसकी विस्तृत योजना बनाने के साथ ही आम जन में जागृति पैदा की जाकर उसमें मिलने वाले नालों और नदियों को रोका जाए तथा जल संवर्धन के लगातार प्रयास किये जायें। महंत श्री विशालदास जी महाराज, निर्वाणी अखाडा, अध्यक्ष संत समिति ने शिप्रा नदी के संरक्षण के लिए पौधों को लगाने, बडे पेडों को नही काटने के लिए जन जागरण की बात कही। उन्होंने कहा कि जन जागरण से ही नदी की रक्षा की जा सकती है, नदी हमें पानी देती है तो हमें नदी को गंदी नहीं करना चाहिये।2 नवंबर से चार दिवसीय “उद्गम से संगम पर्यंत संपूर्ण शिप्रा प्रदक्षिणा” यात्रा त्रिशूल शिवगण वाहिनी द्वारा निकली जाने वाली यात्रा का समापन 5 नवंबर को एक दिया शिप्रा के नाम” अभियान के साथ होगा

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button