चैत्र नवरात्रि पर विशेष अभियान : वागड़ की अनूठी स्वास्थ्य परंपरा – नीम रसपान


– श्रीमति भुवनेश्वरी मालोत , महावीर इंटरनेशनल
वागड़ अंचल अपनी समृद्ध लोक परंपराओं और प्रकृति से जुड़े जीवन मूल्यों के लिए प्रसिद्ध रहा है। यहाँ की एक विशेष और स्वास्थ्यवर्धक परंपरा है—“नीम रसपान”। यह परंपरा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य और प्राकृतिक चिकित्सा का एक सशक्त उदाहरण है।
भारतीय संस्कृति में नीम को औषधीय वृक्ष के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है। नीम की कल युग का कल्प वृक्ष भी कहा गया है इसको ग्रामीण औषधालय कहा जाता है, क्योंकि इसके प्रत्येक भाग—पत्तियाँ निबोली फूल, छाल, फल और जड़ में औषधीय गुण विद्यमान होते हैं।नीम का साबुन अत्यधिक प्रसिद्ध है नीम का रस शरीर के लिए प्राकृतिक शुद्धिकरण का कार्य करता है। यह रक्त को साफ करता है, त्वचा रोगों को दूर करता है तथा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है। इसलिए एक नीम -सौ हकीम के बराबर उसे निरूपित किया गया है।
वागड़ क्षेत्र में चैत्र माह के दौरान 9 दिनों तक नीम रसपान की परंपरा निभाई जाती है। इस दौरान लोग सामूहिक रूप से एकत्रित होकर नीम का रस ग्रहण करते हैं।जगह जगह इसके लिए नीम रस पान का आयोजन किया जाता है।यह न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का प्रतीक है, बल्कि सामूहिकता और सामाजिक एकता को भी दर्शाता है।
नीम में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल, एंटीसेप्टिक एंटी कैंसर एंटी वर्मीडीडल एंटी डायबिटिक और एंटीएलर्जिक गुण पाए जाते हैं। नीम हमारा चर्म रोग विशेषज्ञ भी है यह अनेक बीमारियों से बचाव में सहायक होता है, इसलिए इसे “100 रोगों की एक दवा” कहा जाता है। आधुनिक जीवनशैली में जहाँ लोग रासायनिक दवाओं पर निर्भर होते जा रहे हैं, वहाँ नीम जैसे प्राकृतिक विकल्प का महत्व और भी बढ़ जाता है।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी नीम के महत्व को स्वीकार करते हुए इसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जनस्वास्थ्य का आधार माना था। उनके विचार आज भी प्रासंगिक हैं, जब हम प्राकृतिक और सतत जीवनशैली की ओर लौटने का प्रयास कर रहे हैं।
आज आवश्यकता है कि हम इस परंपरा को न केवल बनाए रखें, बल्कि इसे और अधिक लोगों तक पहुँचाएं। नीम के वृक्षों का अधिकाधिक रोपण करें, “नीम महोत्सव” का आयोजन करें और आने वाली पीढ़ियों को इस अमूल्य धरोहर से परिचित कराएं।
अंततः कहा जा सकता है कि नीम केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि स्वस्थ और संतुलित जीवन का प्रतीक है। वागड़ की यह अनूठी परंपरा हमें यह संदेश देती है कि प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर ही सच्चा स्वास्थ्य और सुख प्राप्त किया जा सकता है।
हम सरकार से निवेदन करते है कि नीम वृक्ष को राष्ट्रीय स्वास्थ्य वृक्ष के रूप में दर्जा दिया जाए ।हम वृक्षों को देवी देवताओं के रूप में पूजा करते है।हम वागड़ वासी भी नीम को लिंबडा बावसी के रूप में पुकारते है।आइए हम सब मिलकर गाँव गांव गली मोहल्लों में चैत्र नवरात्रि पर निःशुल्क नीम रस क्लीनिक लगा कर लोगों की स्वास्थ्य चेतना को जगाये।



