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दुनिया में एक मात्र भगवान जिन्हें भक्त सिर झुकाकर शराब का भोग लगाते, आज निकलेगी सवारी

-काल भैरव अष्टमी पर मंदिर में भक्तों का उमड़ा सैलाब, विक्रांत भैरव में लगा तांता

-काल भैरव की आज सवारी निकलेगी, 56 तरह की शराब का भोग आज लगेगा

उज्जैन। रविवार को शाम चार बजे भगवान काल भैरव की सवारी निकलेगी। कलेक्टर नीरज सिंह और मंदिर पुजारी ओमप्रकाश चतुर्वेदी भगवान को पगड़ी पहनाकर पूजा अर्चना करेंगे। उल्लेखनीय है कि शनिवार को काल भैरव अष्टमी पर मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ा। सुबह से ही मंदिर में बाबा काल भैरव का पूजन, अभिषेक किया गया। काल भैरव अष्टमी पर कालभैरव के 20 घंटे तक भक्तों को दर्शन का लाभ मिला। इसकी शुरुआत 23 नवंबर की सुबह 6 बजे मंदिर से पट खुलने के साथ हुई ‌। देर रात तक मंदिर में महाआरती की गई । काल भैरव अष्टमी पर समाजसेवी और आरके डेवलपर के संचालक राकेश अग्रवाल भी पूजा अर्चना करने पहुंचे थे। उन्होंने पूजा अर्चना कर सबकी समृद्धि और सुख शांति की कामना की। अग्रवाल ने कहा कि भगवान कालभैरव सबकी मनोकामना पूरी करते हैं।

कालभैरव मंदिर प्रशासक संध्या मार्कंडेय और मंदिर के पुजारी ओम प्रकाश चतुर्वेदी के अनुसार अष्टमी के अवसर पर दो दिन उत्सव मनाया जाएगा। 23 नवंबर को इसकी शुरुआत हुई है। मंदिर परिसर को फूलों और रंग-बिरंगी रोशनी से सजाया जाएगा। 24 नवंबर की सुबह 6 बजे से मंदिर के पट खोले जाएंगे। उसके बाद बाबा का पूजन, अर्चन कर 56 भोग अर्पित किए जाएंगे। दोपहर 3.30 बजे कलेक्टर नीरजकुमार सिंह मंदिर पहुंचकर कालभैरव का पूजन करेंगे। शाम 4 बजे रजत पालकी में विराजमान होकर कालभैरव नगर भ्रमण पर निकलेंगे। सवारी मंदिर से भैरव, सिद्धनाथ होकर पुनः मंदिर पहुंचेगी। मंदिर पहुंचने पर बाबा की महाआरती की जाएगी।
उधर श्री विक्रांत भैरव जन्मोत्सव का आयोजन 23 नवंबर को शुरू हुआ। चंद्रमोहन डबराल और नीलेश विश्नोई के अनुसार श्री विक्रांत भैरव भक्त मंडली की अगुवाई में 23 नवंबर की सुबह 9 बजे से 24 नवंबर की सुबह तक विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम चल रहे हैं। पहले दिन सुबह 9 बजे प्रातःकालीन आरती, 10 बजे रुद्राभिषेक और सुंदरकांड हूआ। दोपहर 12 बजे चोला चढ़ाया। दोपहर 2 बजे हवन हुआ। दोपहर 3 बजे आरती और 56 भोग लगाया। शाम 4 बजे भोजन प्रसाद वितरण किया। शाम 6 बजे भजन, शाम 7 बजे रामायण पाठ, रात 11 बजे हवन किया। रात 12 बजे आरती और रात्रि जागरण हुआ। 24 नवंबर की सुबह 8 बजे सुप्रभात आरती के साथ भैरव जयंती कार्यक्रम का समापन होगा। इसके अलावा काल भैरव और विक्रांत भैरव अष्टमी पर सुदर्शन महाराज के नेतृत्व में भंडारे का आयोजन किया गया। 12 हजार से ज्यादा भक्तों के प्रसादी ग्रहण की है। रविवार को 56 तरह की मदिरा का भोग लगाया जाएगा।
वहीं श्री महाकालेश्वर मंदिर के कोटितीर्थ कुंड पर स्थित श्री रूद्र भैरव मंदिर पर भगवान का पूजन-अभिषेक किया गया। मंदिर के पुजारी पं. सुरेंद्र चौबे ने बताया कि शिव मंदिरों में भगवान भैरव का स्थान भी होता है। भैरव बाबा शिव के सेनापति है। शनिवार को भैरव अष्टमी पर

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विक्रांत भैरव को सात्विक प्रसादी चढ़ाएं: विक्रांत भैरव मंदिर पुजारी नीलेश विश्नोई ने कहा कि कुछ लोगों ने अफवाह फैला रखी है कि विक्रांत भैरव को बीड़ी, मदिरा या अन्य तामसिक वस्तु की प्रसादी चढ़ाई जाती है। वास्तविक में बाबा को मिठाई प्रसादी चढ़ाई जाती है। सनातन धर्म में इस प्रकार की वस्तु वर्जित है।

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