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डायरिया रोकने डेढ़ महीने चलेगा अभियान, आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहुंचेगी टीम


उज्जैन( राजेश रावत)। शिशु मृत्यु दर और मातृ मृत्यु दर कम करने के लिए जिले में आज से स्टॉप डायरिया कैंपेन सह दस्तक अभियान शुरू हो गया है। इस अभियान के तहत आंगनबाड़ी केदो पर स्वास्थ्य विभाग की टीम जाकर जीरो से 5 साल के बच्चों का सर्वे कर उन्हें बचाव के तरीके बताकर और दवाई उपलब्ध कराएगी। यह जानकारी डॉ जितेंद्र राजपूत और डॉक्टर आरके पाल ने दी। उन्होंने बताया कि शासन के निर्देशानुसार 22 जुलाई 2025 से उज्जैन जिले में भी स्टॉप डायरिया कैंपेन सह दस्तक अभियान आयोजित किया जायेगा। जो 16 सितम्बर 2025 तक चलाया जायेगा। उन्होंने बताया कि एसआरएस 2021-22 के अनुसार, भारत में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु का 6.8 प्रतिशत कारण डायरिया है। यह आंकड़ा इस बात का स्पष्ट संकेत है कि डायरिया एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। विषय की गंभीरता को देखते हुए अभियान चलाया जा रहा है। यह अभियान साक्ष्य आधारित गतिविधियों पर केन्द्रित है जिसका प्रभाव प्रदेश में बाल मृत्यु दर में कमी के रूप में परिलक्षित हुआ है। अभियान में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देशों को भी समाहित किया गया है। इस दौरान इन बच्चों में गंभीर कुपोषण, ऐनीमिया, निमोनियां, निर्जलीकरण, संक्रमण की पहचान त्वरित उपचार एवं आवश्यकतानुसार रेफरल के साथ-साथ उन्हें विटामिन ए घोल पिलाना, ओ.आर.एस. पैकेट, जिंक टेबलेट का वितरण सेवा प्रदायगी की जायेगी। प्रमुख सेवाएँ एवं गतिविधियाँः निमोनिया व डायरिया की रोकथाम और प्रबंधन बाल्यावस्था में निमोनिया व डायरिया के लक्षणों की त्वरित पहचान एवं प्राथमिक प्रबंधन और सुसंगत रेफरल का वितरण 5 वर्ष से कम सभी बच्चों को ORS तथा Zink टेबलेट की संयुक्त किट का निः शुल्क वितरण एवं सही उपयोग सुनिश्चित करने हेतु माताओं व परिजनों को प्रशिक्षण / समझाईश प्रदान की जाएगी व गंभीर कुपोषण की पहचान और प्रबंधन 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में सक्रिय रूप से गंभीर कुपोषण की पहचान, चिन्हित बच्चों का त्वरित प्रबंधन एवं आवश्यकतानुसार निकटतम केन्द्र पर जानकारी दी जाएगी ।
साथ ही एनीमिया स्क्रीनिंग और उपचार 6 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों में डिजीटल ग्लोबल मीटर से हीमोग्लोबिन की जाँच एवं जाँच के आधार पर प्रोटोकॉल अनुसार उपचार प्रदान किया जाएगा। उच्च जोखिम नवजात एवं शिशुओं की निगरानी करने के साथ पहचान एवं आवश्यकतानुसार रेफर किया जाएगा ।
विटामिन-ए अनुपूरण 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को आयु के अनुसार विटामिन ए की खुराक दी जाएगी साथ ही समुचित पूरक आहार एवं स्तनपान पर परामर्श अभिभावकों को इन्फैंट व यंग चाइल्ड फीडिंग पर परामर्श एवं स्थानीय खाद्य संसाधनों के उपयोग की समझाइश दी जाएगी।


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