सी.डी.एफ.डी., हैदराबाद और एन.एस.आई.टी अहमदाबाद के बीच DNA रिसर्च पर एमओयू

अहमदाबाद, 13 मार्च l भारत सरकार के विज्ञान विभाग अंतर्गत संचालित एक प्रमुख अनुसंधान प्रयोगशाला “डी.एन.ए. फिंगरप्रिंटिंग एवं डायग्नोस्टिक्स केंद्र (सी.डी.एफ.डी.) – हैदराबाद और नरनारायण शास्त्री प्रौद्योगिकी संस्थान- फोरेंसिक विज्ञान एवं साइबर सुरक्षा महाविद्यालय जेतलपुर, अहमदाबाद ने बाल तस्करी जैसे अपराधों की रोकथाम के लिए अनुसंधान करने हेतु हैदराबाद में एम ओ यू पर हस्ताक्षर किए। नर नारायण शास्त्री संस्थान के कैंपस निदेशक संजय शर्मा ने बताया कि सी.डी.एफ.डी. प्रयोगशाला में डी.एन.ए. पर अनुसंधान के लिए पूरे भारत से वैज्ञानिक आते हैं। प्रयोगशाला में मानसिक मंदता जैसे आनुवंशिक विकारों जैसे विभिन्न रोगों के परीक्षण और निदान के लिए दुनिया की सबसे उन्नत सुविधाएं उपलब्ध हैं। सी.डी.एफ.डी. हैदराबाद ने भारत के पहले निजी संगठन के एम ओ यू पर हस्ताक्षर किए हैं।
संगठन के प्रबंध न्यासी शास्त्री पुरुषोत्तम प्रकाश स्वामी ने कहा कि दोनों संगठन समाज में अपराध को रोकने और इसे अपराध मुक्त समाज बनाने के लिए डी.एन.ए. प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के लिए संयुक्त प्रयास करेंगे lइस एम ओ यू पर सी.डी.एफ.डी. के निदेशक उल्लास कोलथर और एन.एस.आई.टी.-आई.एफ.एस.सी. जेतलपुर के उपाध्यक्ष धर्मेश वंडरा ने हस्ताक्षर किए और आदान-प्रदान किया। इस अवसर पर गुजरात राज्य के पूर्व डी.जी.पी. डॉ. केशव कुमार और भारत के प्रमुख डी.एन.ए. वैज्ञानिक डॉ. मधुसूदन रेड्डी भी उपस्थित थे।
संस्था के उपाध्यक्ष धर्मेश वंद्रा ने बताया कि दोनों संस्थाओं का मुख्य लक्ष्य डीएनए के माध्यम से फोरेंसिक जांच में तेजी लाना होगा, खासकर बाल तस्करी के मामलों में जब पुलिस की छापेमारी में मिले छोटे बच्चे दूसरे राज्यों से होते हैं और क्षेत्रीय भाषा नहीं जानते हैं, तो उनके माता-पिता का पता लगाना असंभव होता है। इनमें से अधिकांश अनाथ बच्चे राज्य के बाल संरक्षण गृहों में बड़े होते हैं और चूंकि ऐसे बच्चे अल्पसंख्यक पृष्ठभूमि में बड़े होते हैं, इसलिए उनके युवावस्था में आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने की संभावना अधिक होती है। अगर बाल तस्करी में पकड़े गए बच्चों को उनके माता-पिता को लौटा दिया जाए, तो भविष्य में समाज से एक अपराधी कम हो जाएगा। ज्यादातर मामलों में दूसरे राज्यों से तस्करी करके लाए गए बच्चे ही पाए जाते हैं।
दोनों संस्थाएं मिलकर भारत के अलग-अलग राज्यों के डीएनए पर रिसर्च करेंगी और एक डीएनए बैंक बनाएंगी जो एआई टूल्स का इस्तेमाल कर यह पता लगाने में मदद करेगी कि पाया गया बच्चा किस राज्य का हो सकता है ताकि मिले बच्चे को उसके माता-पिता तक पहुंचाया जा सके और तस्करी के मामलों का जल्द निपटारा सुनिश्चित करने के लिए दोनों संस्थाएं मिलकर डीएनए के लिए एआई बैंक बनाएंगी। इस संबंध में पूर्व डीजीपी केशव कुमार ने कहा कि अगर यह एआई डीएनए बैंक सॉफ्टवेयर सफल होता है तो भविष्य में यह देश के लिए मददगार साबित होगा कि भारत में प्रवेश करने वाले तत्व जैविक हैं और उन्हें वापस उस देश में भेजा जा सकता है। जिस तरह से अमेरिका वर्तमान में अवैध प्रवासियों पर नकेल कस रहा है और उन्हें वापस उनके देशों में भेज रहा है, उसी तरह भारत में भी अवैध प्रवासी रह रहे हैं जो झूठे सबूतों के आधार पर देश में अपनी नागरिकता साबित करते हैं। डीएनए परीक्षण करके उन्हें निर्वासित करना आसान होगा। इस बारे में, संस्था के मैनेजिंग ट्रस्टी शास्त्री पुरषोत्तम प्रकाश स्वामी ने कहा कि इन शोधों के माध्यम से, भारत देश की सेवा करने में सक्षम होगा। हमारी संस्था हमेशा सबसे आगे रहेगी, इस कारण से, फोरेंसिक का अध्ययन करने वाले छात्रों को आधुनिक उपकरणों के माध्यम से व्यावहारिक ज्ञान दिया जाता है। इस संगठन का उद्देश्य भविष्य में तेजी से डीएनए परीक्षण के लिए एक मोबाइल लैब का निर्माण करना है, जिसका उपयोग न केवल अनुसंधान के लिए किया जाएगा, बल्कि गुजरात राज्य में अपराध के दृश्यों पर फोरेंसिक डीएनए की ऑन-साइट जांच के लिए भी किया जाएगा। भारत सरकार के गृह विभाग से संबद्ध राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय गांधीनगर, नर नारायण शास्त्री इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी-इंस्टीट्यूट ऑफ फोरेंसिक साइंस एंड साइबर सिक्योरिटी जेतलपुर कॉलेज का उद्देश्य एआई उपकरण बनाना और नए शोध के माध्यम से अपराधों को होने से पहले रोकने के तरीके पर डिजिटल फोरेंसिक विशेषज्ञों को प्रशिक्षित करना है



