जिस तरह विश्वविद्यालय उपाधि देते हैं, उसी तरह से स्वामी चक्रपाणि महाराज को जगद्गुरु शंकराचार्य की उपाधि प्रदान की गई : रविंद्रपुरी महाराज

उज्जैन में पत्रकारों से चर्चा करते हुए बोले-संतों के खिलाफ काम करने वालों को सिंहस्थ तक जिलाबदर किया जाए
उज्जैन । जिस तरह से विश्वविद्यालय पीएचडी आदि की उपाधि छात्रों को प्रदान करते हैं, उसी तरह से अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने स्वामी चक्रपाणि महाराज को जगतगुरु शंकराचार्य की उपाधि प्रदान की है। देश में शंकराचार्य की पीठ चार ही हैं और सनातन धर्म के चार ही संकराचार्य हैं। यह बात अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने उज्जैन में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही। उन्होंने कहा कि कुछ लोग उपाधि प्रदान किए जाने को लेकर बहस का मुद्दा बना रहे हैं, जबकि उपाधि देने को लेकर कोई विवाद नहीं है। कोई भी अखाड़ा उपाधि प्रदान कर सकता है। रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि देश में संतों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। सनातन धर्म और हिंदुओं को जगाने का काम संत करते आ रहे हैं और करते रहेंगे। कुछ लोगों की वजह से संतों को परेशान किया जा रहा है। इसलिए उज्जैन में सिंहस्थ से पहले ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सरकार और पुलिस से आग्रह है कि संतों को परेशान और उनके खिलाफ षडयंत्र करने वाले लोगों को सिंहस्थ तक जिला बदर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा था। इसका खुलासा होने के बाद एफआईआर दर्ज कराई गई है और कलेक्टर और एसपी को ज्ञापन देकर ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
फर्जी संतों को पकड़ने के लिए चले कालनेमि अभियान अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि उज्जैन में आगामी दिनों में सिंहस्थ लगने वाला है. इसलिए कुछ लोग भगवा चोला पहनकर और माला धारण करके घूमने लगे हैं, खुद को संत कहने लगे हैं। हमने पुलिस को ज्ञापन देकर कहा कि ऐसे फर्जी संतों और चौलाधारण करने वालों को पहचान कालनेमिअभियान चलाकर की जाए। उन्हें पकड़कर शहर से बाहर किया जाए ताकि देश विदेश से जो सो आएंउनके साथ न्याय हो सके और पे फर्जी संतजनता को गुमराह न कर सकें।
उज्जैन कोर्ट से पटेल की जमानत याचिका खारिज महामंडलेश्वर स्वामी शांतिस्वरुपानंद को बलात्कार के झूठे केस में फंसाने के षडयंत्र में आरोपी पत्रकार घनश्याम पटेल की ओर से आज दिनांक 11/03/2026 को सत्र न्यायालय उज्जैन में अग्रिम जमानत याचिका लगाई गई थी, जिसमें महामंडलेश्वर स्वामी शांति स्वरूपानंद की ओर से सीनियर एडवोकेट वीरेंद्र शर्मा द्वारा पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष तर्क रखे गए। उन्होंने अपने में कहा कि संत समाज की प्रतिष्ठा को धूमिल करने के उद्देश उद्देश्य से आरोपी ने उक्त कृत्य किया है। उज्जैन में संस्कृति, संत 2025 में आने वाला है। समाज व उज्जैन शहर की प्रतिष्ठा को विश्व भर में धूमिल करने के उद्देश्य से महामंडलेश्वर के विरुद्ध इस प्रकार का झूठे केस में फंसाने का षड्यंत्र रचने का कृत्य आरोपी द्वारा किया गया है। उसके विभिन्न आपराधिक रिकॉर्ड भी हैं। यदि उसे जमानत का लाभ दिया गया तो उसके फरार होने को पूर्ण संभावना है एवं यह साक्ष्य को प्रभावित भी कर सकता है। उनके त से सहमत होकर न्यायालय द्वारा आरोपी पनश्याम पटेल की जमानत निरस्त की।



