टेक्नोलॉजी से प्रेरित अपराध के दौर में फॉरेंसिक साइंस न्याय का ‘सुरक्षा कवच’ है: न्यायमूर्ति सूर्यकान्त


-सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की गरिमामय उपस्थिति में एनएफएसयू का चतुर्थ दीक्षांत समारोह संपन्न
– उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी एवं गुजरात उच्च न्यायायल के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्रीमती सुनिता अग्रवाल सम्माननीय अतिथि के रूप में उपस्थित रहे
– प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में NFSU ग्लोबल फोरेंसिक सिक्योरिटी के लिए संकल्पबद्धः : पद्मश्री डॉ. जे.एम. व्यास
गांधीनगर। राष्ट्रीय न्यायालयिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU), गांधीनगर का चतुर्थ दीक्षांत समारोह 27 फरवरी, 2026 को आयोजित किया जाएगा। दीक्षांत समारोह के “मुख्य अतिथि” के रूप में सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, माननीय न्यायमूर्ति श्री सूर्यकान्त इस अवसर पर उपस्थित रहे। इस प्रतिष्ठित शैक्षणिक अवसर पर माननीय न्यायमूर्ति श्री अरविंद कुमार, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश; माननीय न्यायमूर्ति श्री एन.वी. अंजारिया, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश; माननीय न्यायमूर्ति श्री वी.एम. पंचोली, भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश; श्री हर्ष संघवी, माननीय उप मुख्यमंत्री, गुजरात एवं माननीय न्यायमूर्ति श्रीमती सुनिता अग्रवाल, मुख्य न्यायाधीश, गुजरात उच्च न्यायालय “सम्माननीय अतिथि” के रूप में उपस्थित रहे। एनएफएसयू के कुलपति और भारत के वरिष्ठ फोरेंसिक वैज्ञानिक ‘पद्मश्री’ से सम्मानित डॉ. जे.एम. व्यास ने दीक्षांत समारोह में डिग्री प्रदान की। चतुर्थ दीक्षांत समारोह के तहत विश्वविद्यालय के कुल 1799 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गई। जिसके अंतर्गत 17 विद्यार्थियों को पीएच.डी. की उपाधि एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को 52 स्वर्ण पदक भी प्रदान किए गए। इस अवसर पर राष्ट्रीय न्यायालयिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU), गांधीनगर के परिसर में डिजिटल प्रणाली आधारित अंतरराष्ट्रीय विवाद समाधान केंद्र का उद्घाटन किया गया। यह केंद्र न केवल भारत बल्कि वैश्विक स्तर पर विवाद समाधान की प्रक्रिया को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाएगा।
भारत के चीफ़ जस्टिस (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने अपने कॉन्वोकेशन भाषण में जस्टिस डिलीवरी सिस्टम में फ़ॉरेंसिक साइंस की भूमिका के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने इस डिसिप्लिन को टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से होने वाले मुश्किल अपराधों के समय में न्याय के लिए ‘सुरक्षा कवच’ कहा। अपने भाषण में, उन्होंने स्टूडेंट्स से यह पक्का करने को कहा कि ऑब्जेक्टिविटी के साथ साइंटिफिक जोश भी हो। उन्होंने कहा कि फ़ॉरेंसिक साइंटिस्ट्स द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट्स का असर लैब्स से कहीं ज़्यादा होता है क्योंकि यह ज़िंदगी पर असर डाल सकती हैं। उन्होंने उनसे यह पक्का करने को कहा कि भारत में जस्टिस डिलीवरी सिस्टम साइंटिफिक ऑब्जेक्टिविटी और निष्पक्षता पर आधारित सबूतों के साथ प्रिंसिपल्स पर आधारित और सटीक बना रहे। CJI ने कहा कि ज्यूडिशियरी नए ज़माने के अपराधों में एक्सपर्ट्स की राय पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट पर एक्सपर्ट्स के साइन सिर्फ़ एक प्रोफ़ेशनल राय नहीं बल्कि भरोसे का सबूत हैं। उन्होंने जस्टिस डिलीवरी को एक कलेक्टिव एंटरप्राइज़ बताया जिसमें जजों और वकीलों से लेकर एक्सपर्ट्स और इन्वेस्टिगेटर तक सभी शामिल हैं।
NFSU के स्थापक कुलपति, पद्मश्री से सम्मानित डॉ. जे.एम. व्यास ने कहा की माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में NFSU ग्लोबल सिक्योरिटी और वैज्ञानिक सच पर आधारित न्याय को बढ़ावा देने के लिए ईमानदारी और देश की सेवा के संकल्प के साथ कार्यरत है। इस साल, 66 अलग-अलग प्रोग्राम के 1,799 स्टूडेंट्स, जिनमें 21 देशों के 98 इंटरनेशनल स्टूडेंट्स शामिल थेउन्हें पदवी प्रदान हुई, जो NFSU की बढ़ती वैश्विक पहुंच को दर्शाता है। NFSU से उत्तीर्ण हुए 7,932 छात्र दुनिया भर की इन्वेस्टिगेटिव एजेंसियों, लैब्स, कोर्ट्स और सिक्योरिटी ऑर्गनाइज़ेशन्स में फोरेंसिक एक्सपर्ट्स के तौर पर काम कर रहे हैं। NFSU ने लगभग 28,000 प्रोफेशनल्स को ट्रेनिंग दी है, जिसमें 5,400 ज्यूडिशियल ऑफिसर्स और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों का समावेश होता हैं। दीक्षांत समारोह में ज़िम्बाब्वे, साउदी अरेबिया सहित कई देशों के गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। साथ ही भारत के विभिन्न क्षेत्रों के गणमान्य व्यक्ति, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स एवं एकेडेमिक काउंसिल के सदस्य, विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के अधिकारी, न्यायिक अधिकारी, छात्र और अभिभावक भी दीक्षान्त समारोह में शामिल हुए।



