स्वास्थ्य

होली पर विशेष : रंगों का उपयोग करें सावधानी से

– लय द्विवेदी
आपसी सौहार्द, सद्भाव, सहयोग और समन्वय का त्योहार होली आ गया है l होली के साथ ही रंगों की फुहार भी अब चारों ओर नजर आएगी l होली के इस रंगा रंग कार्यक्रम के दौरान अब रंगों का उपयोग कुछ सावधानी के साथ करना आवश्यक हो गया है l जहां तक प्राकृतिक एवं परंपरागत रंगों की बात करें तो गुलाल जैसे सामान्य उपयोग के रंग किसी तरह का नुकसान नहीं करते हैं लेकिन अब बाजार में मिलने वाले गुलाल जैसे सामान्य उपयोग के रंग में भी मिलावट की समस्या बढ़ती जा रही है और इनको बनाने में केमिकल या अन्य सामग्री का उपयोग करने से यह नुकसानदायक हो सकते हैं l इसी तरह अब बाजार में मिलने वाले दूसरे कलर भी किन केमिकल से बनाए जा रहे हैं यह पता नहीं चल पा रहा है और यह रंग लगने के बाद क्या असर करेंगे, यह आकलन करना मुश्किल हो गया है जिससे स्थिति काफी गंभीर हो चली है l कई ऐसे रंग बाजार में उपलब्ध है जिन्हें लगने के बाद निकलने में काफी समय लग जाता है और कई रंग कई दिनों तक अपना असर नहीं छोड़ते हैं l दूसरी ओर इन रंगों के उपयोग करने के बाद कई लोगों में स्किन से जुड़े हुए कई मामलों की समस्याएं नजर आने लगी है तो यह रंग आंख, नाक, मुंह या कान में जाने के बाद दुष्प्रभाव भी छोड़ रहे हैं ऐसी शिकायतें भी आम हो गई है l
रंग, प्रेम और भाईचारे के इस त्यौहार पर एक दूसरे को शुभकामनाएं देने के उद्देश्य से रंग लगाने की हमारी पुरातन परंपराओं में अब रासायनिक दुष्प्रभाव युक्त रंगों के उपयोग के चलते कई लोग होली के इस कार्यक्रम से दूर भी रहते हैं l रंगों का सही चयन कर उपयोग करने से किसी तरह की हानि की संभावना नहीं है लेकिन अगर केमिकल युक्त रंगों का उपयोग किया जाए और इससे किसी तरह का नुकसान हो तो यह बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है इसलिए सामान्य उपयोग के रंग गुलाल आदि किसी नुकसानदायक प्रभाव से मुक्त है यह संतुष्टि करने के बाद ही रंगों का उपयोग करें l जहां तक रंगों के उपयोग की बात है तो किशोर व युवा वर्ग में रंगों से होली मनाने का जो उत्साह रहता है लेकिन बुजुर्ग लोग भी इस त्यौहार को पूरी आत्मीयता से मनाते हैं l इस दौरान छोटे बच्चों को भी कलर लगाने की होड़ रहती है इस स्थिति में इस बात का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है कि 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों को गहरे रंगों से मुक्त रखा जाए और 1 साल से कम आयु के बच्चों को रंगों के इस कार्यक्रम से दूर रखना ही उनकी सुरक्षा सुनिश्चित कर सकता है, इसलिए रंगों के त्यौहार को सौहार्द, सद्भाव आत्मीयता और प्रेम भाव से मनाया जाए l रंग लगाना महत्वपूर्ण नहीं है रंगारंग मानसिकता से कार्यक्रमों में प्रेमभाव से जुड़ना भी होली को प्रसन्नता से मनाने का प्रभावी तरीका है l

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