नियंत्रित मन हमारे जीवन को शांतिपूर्ण बनाता है: डॉ. जे.एम. व्यास

-एनएफएसयू में विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह मनाया -तटरक्षक बल और एनएफएसयू मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं: डीआईजी प्रशांत के. शर्मा
गांधीनगर। विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष्य में, स्कूल ओफ बिहेवियरल फोरेंसिक्स ने राष्ट्रीय न्यायालयिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू), गांधीनगर में विश्व मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह मनाया। दिनांक 15 अक्टूबर, 2025 को आयोजित मुख्य समारोह में ‘पद्म श्री’ से सम्मानित, एनएफएसयू के कुलपति, डॉ. जे.एम. व्यास उपस्थित थे। कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथियों में डीआईजी प्रशांत के. शर्मा, टीएम, सीओएस (ऑफजी); मुख्यालय-सीजीआर (एनडब्ल्यू); ब्रिगेडियर अनिल काकड़े, अहमदाबाद आर्मी कैंट, अहमदाबाद और लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. संजय कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रमुख, मनोचिकित्सा विभाग, आर्मी हॉस्पिटल, अहमदाबाद शामिल थे। प्रो. (डॉ.) एस.ओ. जुनारे, परिसर निदेशक, एनएफएसयू-गांधीनगर; श्री सी.डी. जडेजा, कार्यपालक कुलसचिव, एनएफएसयू और प्रो. (डॉ.) पूर्वी पोखरियाल, परिसर निदेशक, एनएफएसयू-दिल्ली भी मंच पर उपस्थित थे।’पद्म श्री’ से सम्मानित, एनएफएसयू के कुलपति, डॉ. जे.एम. व्यास ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि मन को नियंत्रित करना वायु को नियंत्रित करने जितना ही चुनौतीपूर्ण है। निरंतर अध्ययन और आत्मनिरीक्षण से मन को धीरे-धीरे शिक्षित किया जा सकता है। प्रतिक्रियाओं पर चिंतन करना आवश्यक है। चिंता, भय जैसी भावनात्मक त्रुटियों को समझदारी से दूर रखना चाहिए। भावनात्मक संघर्षों का सामना हर कोई करता है। हालाँकि, धैर्य और स्वाध्याय से दुःख को शांति, सद्भाव और संतोष में बदला जा सकता है। इस प्रकार, एक नियंत्रित मन हमारे जीवन को शांतिपूर्ण बनाता है।
डीआईजी प्रशांत के. शर्मा, टीएम, सीओएस (ऑफग); मुख्यालय-सीजीआर (एनडब्ल्यू) ने अपने भाषण में कहा कि सशस्त्र बलों में मानसिक स्वास्थ्य समस्याएँ ऑपरेशनल स्ट्रेस, आघात, अकेलेपन और डिजिटल ओवरलोड के कारण उत्पन्न होती हैं। सहायता प्रणालियों के बावजूद, आत्महत्या सहित संवेदनशील मामलों में तत्काल विज्ञान-समर्थित हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है। इस संकट से निपटने के लिए, भारतीय तटरक्षक बल और एनएफएसयू ने एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए हैं। जिससे इस संबंध में आगे अनुसंधान और समस्या समाधान हेतु महत्वपूर्ण कदम उठाए जा सकेंगे। इस मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता पैदा करना और आम जनता को इसके महत्व के बारे में समझाना था। कार्यक्रम के अंतिम दिन परिसर में एक ‘मानसिक स्वास्थ्य’ रैली का भी आयोजन किया गया। रैली में छात्रों और संकाय सदस्यों ने भाग लिया। एक कार्यशाला का भी आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने अपने विचार व्यक्त किए। प्रो. (डॉ.) एस.ओ. जुनारे, परिसर निदेशक, एनएफएसयू-गांधीनगर, स्वागत भाषण दीया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. स्मिता पांडे, एसोसिएट डीन-स्कूल ऑफ बिहेवियरल फोरेंसिक्स-एनएफएसयू ने दिया। इस अवसर पर फोरेंसिक मनोविज्ञान विशेषज्ञ, एनएफएसयू के विभिन्न विद्यालयों के डीन और एसोसिएट डीन, संकाय सदस्य और छात्र उपस्थित थे।



