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कृषि विभाग की किसानों को सलाह: फसल में कीट के प्रकोप से बचने जांच करें

-कृषि विभाग द्वारा भारतीय सोयाबीन अनुसंधान इंदौर से प्राप्त जानकारी अनुसार कृषको को सोयाबीन फसल के लिए उपयोगी सलाह

उज्जैन। सोयाबीन की फसल 30 से 40 दिन की हो गई है। इस दौरान कीट का प्रकोप की संभावना रहती है इसलिए किसानों को कृषि विभाग और भारतीय सोयाबीन अनुसंधान केंद्र इंदौर ने सलाह दिए कि वह फसल की जांच करें। ताकि किट के प्रकोप की जानकारी मिल सके और जरूरी उपचार किया जा सके।

यह  जानकारी देते हुए कृषि विभाग के एडीए कमलेश कुमार राठौर ने बताया कि जिले में इस वर्ष खरीफ मौसम में 5.12 लाख हेक्टेयर में फसल लगाने का लक्ष्य रखा गया है जिले में मुख्य रूप से सोयाबीन की फसल ली जाती है जिसका लक्ष्य 5.06 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है चूकि जिले में खरीफ मौसम में सोयाबीन की फसल ही मुख्य फसल है। जिले में सोयाबीन की फसल 30 से लेकर 40 दिन के अवस्था में हो गई है। वर्तमान में सोयाबीन की फसल की स्थिती संतोष जनक है। जिला डायगोनस्टिक टीम समय-समय पर क्षेत्र भ्रमण कर रही है। और वर्तमान में किसान भाईयो द्वारा खरपतवार नाशक डालने का काम लगभग पूर्ण कर लिया गया है। साथ ही फसल की स्थिति संतोष जनक है वर्तमान में फसल में कही पर भी कीटव्याधी का प्रकोप की स्थिती नहीं है। वर्तमान में फसल की आवश्यकता अनुसार वर्षा हो रही है। आज दिनांक तक जिले में 280 मि.ली. वर्षा हो चुकी है।

किसान भाईयो को सलाह है कि अपने खेत की सतत निगरानी करे खेत में जा कर 3-4 पौधों को हिला कर देखे इल्ली/कीट का प्रकोप तो नहीं है। यदि कहीं पर 1 वर्ग मीटर में 3 से 4 इल्लीयां दिखाई दे तो कीटनाशक का स्प्रे करना चाहिए जहाँ पर सोयाबीन की फसल घनी होने पर गर्डल बीटल (रिंग कटर) का प्रकोप संभव है। इसकी पहचान पौधे पर 2 रिंग बने हुए दिखाई देगे व फसल लटकी हुई मुर्झाइ सी दिखाई देगी उसको तोड़ कर खेत से बाहर फेंक देवे। मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार आगामी 2-4 दिनों में जिले में अच्छी वर्षा होने की संभावना है। किसान भाईयो को सलाह है की जल भराव से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए जल निकासी की उचित व्यवस्था करें। यदि कही पर कीट व्याधी का प्रकोप दिखे तो निम्नानुसार दवाईयो का उपयोग करे।

तना मक्खी के नियंत्रण हेतु सलाह हैं कि लक्षण दिखाई देने पर पूर्वमिश्रित कीटनाशक आइसोसायक्लोसरम 9.2 WW.DC (10% W/V) DC (600 मिली/हे.) वा थायोमिथोक्सम 12.60% + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 09.50% जेड.सी. (125) मिली./हे.) या बीटासायफ्लुझिन+इमिडाक्लोप्रिड (350 मिली./हे.) या इंडोक्साकार्ब 15.8ई.सी. (333 मि.ली.) का छिडकाव करें

गर्डल बीटल (रिंग कटर) / पत्ती खाने वाली इल्लियों (सेमीलूपर / तम्बाकू/चने की इल्ली) तथा रस चूसने बाले कीट जैसे सफ़ेद मक्खी/जसीड एवं तना छेदक कीट के लक्षण दिखाई देने पर प्रारंभिक अवस्था में ही इसके नियंत्रण हेतु एसिटेमीप्रीड 25% + बायफॅब्रिन 25% WG (250 ग्रा./हे) या डेट्रानिलिप्रोल 18.18 एस.सी. (250-300 मिली/हे) या थायक्लोप्रिड 21.7 एस.सी. (750 मिली/हे) या प्रोफेनोफॉस 50 ई.सी (1 ली. है) या इमामेक्टीन बेन्जोएट (425 मिली है) या क्लोरएन्ट्रानिलिप्रोल 9.30% + लैम्ब्डा सायहेलोथ्रिन 09.50% जेड.सी. (125 मिली./हे.) का छिडकाव पर्याप्त पानी की मात्रा (नेप्सेक स्प्रयेर या ट्रेक्टर चालित स्त्रयेर से 450 लीटर / हे पॉवर स्प्रेयर से 125 लीटर / हे न्यूनतम) का उपयोग करें.

अधिक जानकारी के लिए अपने क्षेत्रिय कृषि विस्तार अधिकारी/कार्यालय वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, कृषि विज्ञान केन्द्र उज्जैन एवं कृषि विभाग उज्जैन पर संपर्क कर सकते है।

 

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