नगर निगम

महापौर टटवाल बोले- अफसरों की लापरवाही से भंगार बन गई हैं 25 बसें, 100 नई बसों के टेंडर मुझे विश्वास में लिये बगैर

-जनता को सुविधा देने के लिए छह माह पहले बोला था-आयुक्त ने अब तक ध्यान नहीं दिया
उज्जैन। नगर निगम में इन दिनों आयुक्त और महापौर के बीच किस तरह की तल्खी है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महापौर मुकेश टटवाल सिटी बस के वर्कशाप में निरीक्षण करने जाते हैं और आयुक्त वहां नहीं होते हैं। महापौर टटवाल का कहना है कि अफसरों की लापरवाही की वजह से सिटी बस की 25 बसें भंगार हो गई हैं। वे पत्रकारों से चर्चा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को फिर से सिटी बसों को देखने गए थे। परन्तु हालात ऐसे नजर आए कि बसें चलने के लायक ही नहीं बची हैं। बसों के पार्टस नहीं है। सिटी फाड डाली गई हैं। जनता की सुविधा के लिए छह माह पहले आयुक्त को बसों के संचालन के निर्देश दिए थे। उन्होंने ध्यान नहीं दिया। न जनता को सुविधा मिली और न ही बसों को बचाया जा सका। नगर निगम का पैसा खराब हो गया है। उन्होंने कहा कि 100 बसों का टेंडर कर दिया गया है। उनके पास नोटशीट टेंडर के लिए आई थी। उन्होंने नोटशीट पर लिखा है कि मेरे पास टेंडर के लिए आई फाइल से पता चला है कि बसें खरीदी जा रही हैं। इससे पहले किस मद से किस तरह से बसें खरीदी जा रही है और उसकी क्या शर्ते होंगी। पैसा कैसे चुकाया जाएगा, इन सबकी कोई जानकारी नहीं है।

पेयजल संकट के लिए नर्मदा लाइन जोड़ने पर काम नहीं हुआ : महापौर टटवाल का कहना है कि एक साल पहले गऊघाट पर नर्मदा का पानी लाने के लिए भूमि पूजन कराया गया था। अफसरों से कहा गया था कि शहर में पेयजल संकट न खड़ा हो, इसके लिए नर्मदा की लाइन जोड़ दी जाए। स्मार्ट सिटी और महापौर मद से पैसा दिया गया था, लेकिन आज तक लाइन को नहीं जोड़ा गया है। इससे शहर में पेयजल संकट के हालात हैं। परन्तु अभी जिस तरह से पेयजल वितरण किया जा रहा है वैसे ही किया जाएगा।

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