गुजरात

साइबर सिक्योरिटी ओर साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञ डॉ शैलेश अय्यर ने कहा कि मानवीय निर्देशन से तकनीकी का सही उपयोग संभव 

अहमदाबाद, 28 नवम्बर l साइबर सिक्योरिटी ओर साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञ तथा नर नारायण शास्त्री इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी के तहत संचालित फॉरेंसिक साइंस एंड साइबर सिक्योरिटी संस्थान के प्राचार्य प्रोफेसर डॉ . शैलेश अय्यर ने कहा है कि वर्तमान समय में उपलब्ध नवीनतम तकनीकी और सुविधाओं का सकारात्मक व सही उपयोग मानवीय निर्देशन में ही संभव है क्योंकि तकनीकी सुविधाओं का सीधे उपयोग करने पर जो परिणाम मिले हैं वह एकरूपता लिए हुए नहीं मिले है ऐसी स्थिति में समग्र आकलन मानवीय निर्देशन में ही प्रामाणिक और सही तरीके से किया जा सकता है l हमारे प्रतिनिधि के साथ संवाद में डॉ अय्यर ने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों में क्राइम सीन को लेकर सही परिणाम प्राप्त करने उपलब्ध सुविधाओं में एआई, फॉरेंसिक साइंस प्रक्रिया तथा साइबर सिक्योरिटी के तथ्य को मिलाकर परिणाम प्राप्त किए जाते हैं लेकिन कई मामलों में प्राप्त परिणाम एक जैसे नहीं होते हैं जिसके चलते उनकी समीक्षा और निगरानी आवश्यक होती है l

उन्होंने कहा कि देश में आपराधिक समस्याओं पर नियंत्रण और जांच को लेकर नवीन तकनीकी काफी एडवांस होने जा रही है तथा भविष्य में फेस रिकॉग्निशन के आधार पर भी कई आपराधिक मामलों की जांच संभव होगी, ऐसी स्थिति में देश में साइबर सिक्योरिटी व फॉरेंसिक साइंस के क्षेत्र में सक्रिय लोगों की भूमिका बढ़ेगी इसमें कोई संदेह नहीं है l  कई वैश्विक संस्थानों व विश्वविद्यालयो में विजिटिंग प्रोफेसर के रूप में कार्यरत डॉ अय्यर ने कहा कि तकनीकी परिणाम में गलतियों की जांच के लिए मॉनिटरिंग आवश्यक है और नवीन एआई तकनीकी व्यवस्था में इसके विविध विषय क्षेत्रों के माध्यम से कार्य प्रभावी ढंग से आगे बढ़ेगा और सटीक नतीजे प्राप्त करने में मदद मिलेगी l उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण के मामले में वर्तमान में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध है जिसमें फॉरेंसिक साइंस जहां विभिन्न सबूत की जांच व समीक्षा के माध्यम से परिणाम का आधार तैयार करता है वही साइबर सिक्योरिटी डाटा प्रिजर्व करके तथा उपलब्ध तथ्यों के अन्वेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है इसी तरह एआई सुविधा परिणाम को सटीक बनाने में मदद कर सकती है l

उन्होंने कहा कि जिस तरह से आपराधिक कार्यों में नवीनतम तकनीकी और सुविधाओं का उपयोग किया जा रहा है इस तरह से अब अपराधों के अनुसंधान के क्षेत्र में भी एडवांस व्यवस्थाओं के माध्यम से ऐसे मामलों पर नियंत्रण की अच्छी संभावनाएं बनेगी जिसमें फॉरेंसिक साइंस, साइबर सिक्योरिटी व एआई के साथ ही साइकोलॉजी के आधार पर भी अपराधियों की पहचान करने प्रभावी इंतजाम संभव होंगे l किसी क्षेत्र विशेष या कार्य के दौरान लंबे समय से हो रही घटनाओं को लेकर उनकी समीक्षा के आधार पर अपराधियों की पहचान निकालने के लिए साइकोलॉजी का भी महत्वपूर्ण उपयोग संभव हो पाएगा l उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जागरूकता सबसे महत्वपूर्ण है l नवीनतम तकनिकी के महत्वपूर्ण दौर में विज्ञान हमें कई सुविधा व संसाधन उपलब्ध करवा रहा है, इनका सही उपयोग व सटीक विश्लेषण हमारे नियंत्रण में है l उन्होंने कहा कि साइबर सिक्योरिटी के प्रभावी प्रबंधन के बावजूद आए दिन ऑनलाइन होने वाली गड़बड़ी पर नियंत्रण के लिए आमजन को जागरूक होना आवश्यक है तभी इन सुविधाओं का बेहतर उपयोग संभव हो पाएगा l

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